भारतीय मीडिया

दैनिक भास्कर अखबार की नीचता

 देखिये एक संवाददाता जाता है कुछ गेहूं जमीन पर बिखेरता है और एक बच्ची से उठाने को कहता है फिर लिखता है कि,

"सड़क पर बिखरे गेहूं का एक एक दाना समेटती बालिका,इससे उसके भाई बहिन की भूख मिटेगी"

ये हैं लोकतंत्र के "खोटे" स्तंभ

इस भास्कर संस्थान को शर्म नही आई ऐसी फेक न्यूज़ को बनाते हुए वो भी तब जब इस संस्थान ने गरीबों की मदद के लिए करोड़ों रुपये का चंदा जनता से एकत्रित किया है।

असल मे इन लोगों को खबर को सनसनीखेज बनाना है,नैतिकता से ये लोग कोसों दूर है।इनको तो देश को बदनाम करना है और कागज के पन्ने पर नकली कलम चला कर अपनी रोटियां सेकनी है।

भला हो सोशल मीडिया का जो सच सामने ला देता है,करोड़ो का चंदा ऐसे संस्थानो को देने से पहले इनकी वास्तविकता को जानना जरूरी है इन प्रिंट मीडिया के माफियाओं से दी गई रकम का हिसाब मांगना जरूरी है।

प्रस्तुत वीडियो को पूरा देखें और काली स्यायी से लिखने वालों का काला पीला भी देखें।
धिक्कार है👎🏿👎🏿👎🏿


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